Saturday, 4 February 2012

कछमछाइत लोक

कछमछाइत लोक
डा0 चन्द्रमणि.
दीर्घ चाण्डाल रौद सं दगधल मनुख
पाबि सकलैये छाहरि
भूमिगत मनुख सब निकलल
पसरल अछि जहाँ-तहाँ
जेना पथारक छिड़आयल राहड़ि।
पओलक अछि जगह छिड़अयबाक
आ’ संगहि उग्रास।
पापक तापसं रौद कोनो कम छल
रब्बीके दाउन करैत बड़द जकाँ
लोको बेदम्म छल।
बड़दक हिस्साक भूस्सा
बेचैत अछि बटेदार
पीबैत अछि ताड़ी,
आ’ मनुख त’ मनुखेक
खाइछ हिस्सेदारी।
कछमछाइत लोक
श्रम केर मूल्य ताकैये
जगलैये चेतना
चौक-चौराहा पर
मुँह फोलि बाजैये।
दर्द के भोगनिहार भोगी
बुझैत अछि आब
की थिक परिवर्तन
आ’ की थिक विकास।
सभाक भीड़मे घुसिआइत अछि
भाषण सुनैत अछि
गुनैत अछि अपनो जे
के खाइत अछि ओकर हिस्सा ?
कियै बजैत अछि लोक
भ्रष्टाचारक खिस्सा।
भोगियोके नाम पर उठल छै पैसा
बरखो पहिने।
मुँह चुप्प करबाक भेटल रहै फीस
गमछामे चारि सेर गहूम
आ’ एक चौथाइ टाका
घर रहबे नहि करइ
भेल रहै फाका।
मनरेगाक लेबर मे
नाम छैक एकरो
लाभ एकरा कहाँ
भेटल रहै ककरो।
भेटै छै अन्न आब
कैंचा किछु काज ले’
ब्याकुल छल भोगी
सुखमय सुराज ले’।
भीड़ सं फराक भोगी
अतीतकेँ सोचैत अछि
गाँधीक नाम पर
की की ने होइत अछि।
खाइत अछि कुकुर
दोख लागै गिरथाइन के
निम्मन छै बन्न रहौ
चुलहा हलुआइन के।
इन्दिरा आवास ओह!
मनरेगा आह!
छोड़िके बिहार बन्धु आर कतहु जाह।
छटपटाइत अछि बिहार
भ्रष्टमुक्त होयबा ले’
ब्याकुल छह
सूइया मे फाड़ जगह पएबा ले’।
भुन्ना आ’ भाकुर सब
गलफर भरैत अछि,
राजा इमानदार चेफड़ी सटैत अछि।

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