दीप'क की काज स्वयं दीप छी अहाँ,प्रिये इन्द्रपरियो सं नीक छी अहाँ।
बाट मे चलइ छी निज नयना झुकाय,अपरूप इ रूप देखि फूलो लजाय,
भागवन्त भमराक मीत छी अहाँ,प्रिये इन्द्रपरियो सं नीक छी अहाँ। दीप'क की..
कोन वर मांगइ ले मंदिर चलल,पूजाक अगर गुगुल गमगमा रहल,
प्रेम केर प्रतिमा पुनीत छी अहाँ,प्रिये इन्दरपरियो सं नीक छी अहाँ।दीप'क की..
मोनकेर बात गीत बनिक' चलल,कोइलीक गीत बोल कंठे रहल,
कृष्ण केर बाँसुरीक गीत छी अहाँ,प्रिये इन्द्रपरियो सं नीक छी अहाँ। दीप'क की..
एक दरस परस ले मलान भेल छी,कल्पना सं "चन्द्रणणि" उतान भेल छी,
बिनु परिचय जानल सन प्रीत छी अहाँ,प्रिये इन्द्रपरियो सं नीक छी अहाँ। दीप'क की काज..
डा0 चन्द्रमणि.
Thursday, 23 February 2012
Sunday, 19 February 2012
शिवताण्डवस्तोत्रम् ।
अनुवाद :-डा0 चन्द्रमणि.
जटारूप अटवी वन निकसलि जाह्नवीक पावन धारा
गरदनि अवलम्बित फणिमाला ताण्डव नृत्य प्रचण्ड परा,
डिमिक डिमिक डिम डमरू बाजे स्वर लहरी अनुगुंज करे,
करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।1।
जटा कड़ाही मध्य तरंगित गंग सुशोभित शीश जनिक,
धह-धह ज्वाल ललाटक मध्ये राजित बालक शोम तनिक,
शुचि शरीर सुन्दर शशि शेखर सदा हृदय अनुराग भरे
करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।2।
धन-धन गिरि तनया विलास निर्लिप्त निरासक्ते योगी,
हुलसित लखि चहुँदिशि प्रकाश निज शिर-भूषण जन-उपयोगी,
सतत् कृपा दृग पाबि दिगम्बर कष्ट हरे आमोद भरे,
करु कल्याण हमर शिव शंकर जयशिव जयशिव हरे-हरे ।3।
जटाजूट आवर्तित फणि-मणि कुंकुम रागालेप प्रभा,
आलोकित चहुँ दिशा हस्ति चर्माम्बर पहिरन हरक सदा,
ताहि विलक्षण भूतनाथ मे मन विनोद सदिकाल करे,
करु कल्याण हमर शिव शंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।4।
इन्द्रादिक मस्तक आवर्तित पुष्प पराग चरण पनही,
नागराज केर हार निबद्धित जटा शिखर शशि टा धनही,
चिर संपत्ति घटय नहि कहियो रिक्त हमर भंडार भरे,
करु कल्याण हमर शिव शंकर जयशिव जयशिव हरे-हरे ।5।
अग्नि प्रज्वलित भालक वेदी मन्मथ शमन तेज सं भेल,
भाल विशाल कलाधर शोभित छथि आराध्य इन्द्रहुक लेल,
मस्तक महाजटिल शिवशंभुक मम अभिष्ट श्री सिद्ध करे,
करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे ।6।
धह धह अनल भाल विकराले कयल कामदेवहुक हवन,
गिरितनया-कुच पत्रभंग रचना कारीगर शिवा रमण,
अटल भक्ति एकाग्रचित्त हो तीन नयन मे ध्यान धरे,
करु कल्याण हमर शिव शंकर जयशिव जयशिव हरे हरे ।7।
अमारात्रि केर नवल मेघमाला सन कारी कण्ठ जनिक,
हस्तिचर्म धारक तारक विश्वेश गंगपति चन्द्रमणिक,
परम मनोहर कान्तिवान भगवान धनक विस्तार करे,
करु कल्याण हमर शिव शंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।8।
नील कमल दल श्याम प्रभा अनुगमना हरिणी-छवि ग्रीवा,
त्रिपुर काम भव दक्ष यक्ष हरि अन्धक यम हति देव-शिवा,
विघ्न विनाशक पिता महादेव सकल ताप परिताप हरे,
करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।9।
दंभ रहित गिरिजाक मधुप जे कला कदम्ब मंजरी पान,
दक्ष यक्ष हरि यम भव अन्तक मन्मथ त्रिपुर असुर अवशान,
महादेव मम कष्ट विनाशक दिवा राति मन भजन करे,
करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।10।
सिर भुजंग फुफकार वेग सं अनल ललाट धधकि रहलइ,
शिव प्रचणड ताण्डव आलोकित धिमि धिमि नाद धमकि रहलइ,
गुंजित मंगल घोष चहुँदिशि मंगल मंगल सदा करे,
करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।11।
पाथरवत् पुनि कोमल सेजे साँप आर मुक्ता माला,
रत्न माँटि मित शत्रु अभेदे दुर्वादल अक्षी-कमला,
प्रजा आर पृथ्वीपति में समभाव राखि मन जपन करे,
करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।12।
ललित ललाट भाल चन्दा मे सदिखन स्थिर चित्त रहय,
सुरसरि तट करजोरि भाव निर्मल मन शिव केँ जाप करय,
सजल नेत्र शिव चरण कमल मे पल पल छिन छिन नमन करे,
करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे ।13।
अति उत्तम स्तोत्रक वर्णन पाठ नित्य स्मरण करय,
शिवगुरु भक्ति मिलय तहि जन केँ नहि विलोम गति लेश रहय,
गिरिजापति पद भक्ति अहर्निश भवबंधन सं मुक्त करे,
करु कल्याण हमर शिव शंकर जयशिव जयशिव हरे हरे ।14।
इति पूजा संध्याकाले दसकंधर पठितक पाठ करे,
धन सुत गज रथ पाबि 'चन्द्रमणि' संतानक सुख-ठाठ रहे अटल भक्ति सं अचल संपदा भक्तजनक भंडार भरे,
करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे ।15।
अनुवादक: डा0 चन्द्रमणि.
जटारूप अटवी वन निकसलि जाह्नवीक पावन धारा
गरदनि अवलम्बित फणिमाला ताण्डव नृत्य प्रचण्ड परा,
डिमिक डिमिक डिम डमरू बाजे स्वर लहरी अनुगुंज करे,
करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।1।
जटा कड़ाही मध्य तरंगित गंग सुशोभित शीश जनिक,
धह-धह ज्वाल ललाटक मध्ये राजित बालक शोम तनिक,
शुचि शरीर सुन्दर शशि शेखर सदा हृदय अनुराग भरे
करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।2।
धन-धन गिरि तनया विलास निर्लिप्त निरासक्ते योगी,
हुलसित लखि चहुँदिशि प्रकाश निज शिर-भूषण जन-उपयोगी,
सतत् कृपा दृग पाबि दिगम्बर कष्ट हरे आमोद भरे,
करु कल्याण हमर शिव शंकर जयशिव जयशिव हरे-हरे ।3।
जटाजूट आवर्तित फणि-मणि कुंकुम रागालेप प्रभा,
आलोकित चहुँ दिशा हस्ति चर्माम्बर पहिरन हरक सदा,
ताहि विलक्षण भूतनाथ मे मन विनोद सदिकाल करे,
करु कल्याण हमर शिव शंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।4।
इन्द्रादिक मस्तक आवर्तित पुष्प पराग चरण पनही,
नागराज केर हार निबद्धित जटा शिखर शशि टा धनही,
चिर संपत्ति घटय नहि कहियो रिक्त हमर भंडार भरे,
करु कल्याण हमर शिव शंकर जयशिव जयशिव हरे-हरे ।5।
अग्नि प्रज्वलित भालक वेदी मन्मथ शमन तेज सं भेल,
भाल विशाल कलाधर शोभित छथि आराध्य इन्द्रहुक लेल,
मस्तक महाजटिल शिवशंभुक मम अभिष्ट श्री सिद्ध करे,
करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे ।6।
धह धह अनल भाल विकराले कयल कामदेवहुक हवन,
गिरितनया-कुच पत्रभंग रचना कारीगर शिवा रमण,
अटल भक्ति एकाग्रचित्त हो तीन नयन मे ध्यान धरे,
करु कल्याण हमर शिव शंकर जयशिव जयशिव हरे हरे ।7।
अमारात्रि केर नवल मेघमाला सन कारी कण्ठ जनिक,
हस्तिचर्म धारक तारक विश्वेश गंगपति चन्द्रमणिक,
परम मनोहर कान्तिवान भगवान धनक विस्तार करे,
करु कल्याण हमर शिव शंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।8।
नील कमल दल श्याम प्रभा अनुगमना हरिणी-छवि ग्रीवा,
त्रिपुर काम भव दक्ष यक्ष हरि अन्धक यम हति देव-शिवा,
विघ्न विनाशक पिता महादेव सकल ताप परिताप हरे,
करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।9।
दंभ रहित गिरिजाक मधुप जे कला कदम्ब मंजरी पान,
दक्ष यक्ष हरि यम भव अन्तक मन्मथ त्रिपुर असुर अवशान,
महादेव मम कष्ट विनाशक दिवा राति मन भजन करे,
करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।10।
सिर भुजंग फुफकार वेग सं अनल ललाट धधकि रहलइ,
शिव प्रचणड ताण्डव आलोकित धिमि धिमि नाद धमकि रहलइ,
गुंजित मंगल घोष चहुँदिशि मंगल मंगल सदा करे,
करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।11।
पाथरवत् पुनि कोमल सेजे साँप आर मुक्ता माला,
रत्न माँटि मित शत्रु अभेदे दुर्वादल अक्षी-कमला,
प्रजा आर पृथ्वीपति में समभाव राखि मन जपन करे,
करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे।12।
ललित ललाट भाल चन्दा मे सदिखन स्थिर चित्त रहय,
सुरसरि तट करजोरि भाव निर्मल मन शिव केँ जाप करय,
सजल नेत्र शिव चरण कमल मे पल पल छिन छिन नमन करे,
करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे ।13।
अति उत्तम स्तोत्रक वर्णन पाठ नित्य स्मरण करय,
शिवगुरु भक्ति मिलय तहि जन केँ नहि विलोम गति लेश रहय,
गिरिजापति पद भक्ति अहर्निश भवबंधन सं मुक्त करे,
करु कल्याण हमर शिव शंकर जयशिव जयशिव हरे हरे ।14।
इति पूजा संध्याकाले दसकंधर पठितक पाठ करे,
धन सुत गज रथ पाबि 'चन्द्रमणि' संतानक सुख-ठाठ रहे अटल भक्ति सं अचल संपदा भक्तजनक भंडार भरे,
करु कल्याण हमर शिवशंकर जयशिव जयशिव हरे हरे ।15।
अनुवादक: डा0 चन्द्रमणि.
Friday, 17 February 2012
राक्षस.
मनुख जकरा जननीक त्यागक ज्ञान नहि हो,
मनुख जकरा जन्मभूमिक प्रति मान नहि हो,
मनुख जकरा पिताक प्रति सम्मान नहि हो,
मनुख जकरा संतानक प्रति सिनेह नहि हो,
मनुख जकरा आन्तरिक विवेक नहि हो,
मनुख जकरा अपना धन सं संतोष नहि हो,
मनुख जकरा नीक बेजायक होश नहि हो,
मनुख जकरा कृतज्ञताक भाव नहि हो,
मनुख जकरा पर सत्यक प्रभाव नहि हो
मनुख जकरा बातक ब्यवस्था नहि हो,
मनुख जकरा ईश्वर मे आस्था नहि हो-----राक्षस थीक।
मनुख जकरा जन्मभूमिक प्रति मान नहि हो,
मनुख जकरा पिताक प्रति सम्मान नहि हो,
मनुख जकरा संतानक प्रति सिनेह नहि हो,
मनुख जकरा आन्तरिक विवेक नहि हो,
मनुख जकरा अपना धन सं संतोष नहि हो,
मनुख जकरा नीक बेजायक होश नहि हो,
मनुख जकरा कृतज्ञताक भाव नहि हो,
मनुख जकरा पर सत्यक प्रभाव नहि हो
मनुख जकरा बातक ब्यवस्था नहि हो,
मनुख जकरा ईश्वर मे आस्था नहि हो-----राक्षस थीक।
Monday, 13 February 2012
भिलेन्स डे ।
चौदह फरवरीक लगीच अबिते
मोन पड़ल भगलुआक भागब
पड़ोशी गामक समगोत्री छौड़ी संग।
छौड़ी मायक गहना आ'
छौड़ा बापक बटुआ बटोरिक'
भागल रहय पटना,
ई रहय गामक भड़ पैघ घटना।
लभेरिया सं ग्रस्त,
डरे अस्तब्यस्त,
धरा गेल दुनु,
पकड़ा गेल पुलिस सं।
दू थापर मे छौड़ा आ'
भय सं छौड़ी फोलि देलक पोल,
दलमलित भेल गामघर सगरो अनघोल।
औ बाबू!छौड़ा बयान देलक
अनसोहाँत सन,
दहीमे दाँत सन।
सुनने रहियै मदर्स डे/फादर्स डे,
धनिकहा सबहक बर्थ डे।
ई भोगिया त'भागल रहय
मनाब'ले' भिलेन्स डे....?
मोन पड़ल भगलुआक भागब
पड़ोशी गामक समगोत्री छौड़ी संग।
छौड़ी मायक गहना आ'
छौड़ा बापक बटुआ बटोरिक'
भागल रहय पटना,
ई रहय गामक भड़ पैघ घटना।
लभेरिया सं ग्रस्त,
डरे अस्तब्यस्त,
धरा गेल दुनु,
पकड़ा गेल पुलिस सं।
दू थापर मे छौड़ा आ'
भय सं छौड़ी फोलि देलक पोल,
दलमलित भेल गामघर सगरो अनघोल।
औ बाबू!छौड़ा बयान देलक
अनसोहाँत सन,
दहीमे दाँत सन।
सुनने रहियै मदर्स डे/फादर्स डे,
धनिकहा सबहक बर्थ डे।
ई भोगिया त'भागल रहय
मनाब'ले' भिलेन्स डे....?
Saturday, 11 February 2012
ठुमरी.
सजनवा,सात समन्दर पार ।
कौनसे कारण देश छोड़ गये सूना है घरवार।
उपवन कूक रही कोयलिया,दौड़ रही ये चंचल नदिया,
पुरबैया करती किलोल है पानेको अधिकार। सजनवा...
तन पिंजड़ा खाली बिन पंछी,बिन सजना ये काजल बिंदी,
ये गेसू ये गजरा रोये ,रोये मोतिम हार। सजनवा....
मेरे घर आके तो देखे,इतना धन है कौन समेटे,
भरूँगी खाली दुनिया उनकी,इतना दूँगी प्यार।सजनवा...
डा0चन्द्रमणि.
कौनसे कारण देश छोड़ गये सूना है घरवार।
उपवन कूक रही कोयलिया,दौड़ रही ये चंचल नदिया,
पुरबैया करती किलोल है पानेको अधिकार। सजनवा...
तन पिंजड़ा खाली बिन पंछी,बिन सजना ये काजल बिंदी,
ये गेसू ये गजरा रोये ,रोये मोतिम हार। सजनवा....
मेरे घर आके तो देखे,इतना धन है कौन समेटे,
भरूँगी खाली दुनिया उनकी,इतना दूँगी प्यार।सजनवा...
डा0चन्द्रमणि.
Saturday, 4 February 2012
कछमछाइत लोक
कछमछाइत लोक
डा0 चन्द्रमणि.
दीर्घ चाण्डाल रौद सं दगधल मनुख
पाबि सकलैये छाहरि
भूमिगत मनुख सब निकलल
पसरल अछि जहाँ-तहाँ
जेना पथारक छिड़आयल राहड़ि।
पओलक अछि जगह छिड़अयबाक
आ’ संगहि उग्रास।
पापक तापसं रौद कोनो कम छल
रब्बीके दाउन करैत बड़द जकाँ
लोको बेदम्म छल।
बड़दक हिस्साक भूस्सा
बेचैत अछि बटेदार
पीबैत अछि ताड़ी,
आ’ मनुख त’ मनुखेक
खाइछ हिस्सेदारी।
कछमछाइत लोक
श्रम केर मूल्य ताकैये
जगलैये चेतना
चौक-चौराहा पर
मुँह फोलि बाजैये।
दर्द के भोगनिहार भोगी
बुझैत अछि आब
की थिक परिवर्तन
आ’ की थिक विकास।
सभाक भीड़मे घुसिआइत अछि
भाषण सुनैत अछि
गुनैत अछि अपनो जे
के खाइत अछि ओकर हिस्सा ?
कियै बजैत अछि लोक
भ्रष्टाचारक खिस्सा।
भोगियोके नाम पर उठल छै पैसा
बरखो पहिने।
मुँह चुप्प करबाक भेटल रहै फीस
गमछामे चारि सेर गहूम
आ’ एक चौथाइ टाका
घर रहबे नहि करइ
भेल रहै फाका।
मनरेगाक लेबर मे
नाम छैक एकरो
लाभ एकरा कहाँ
भेटल रहै ककरो।
भेटै छै अन्न आब
कैंचा किछु काज ले’
ब्याकुल छल भोगी
सुखमय सुराज ले’।
भीड़ सं फराक भोगी
अतीतकेँ सोचैत अछि
गाँधीक नाम पर
की की ने होइत अछि।
खाइत अछि कुकुर
दोख लागै गिरथाइन के
निम्मन छै बन्न रहौ
चुलहा हलुआइन के।
इन्दिरा आवास ओह!
मनरेगा आह!
छोड़िके बिहार बन्धु आर कतहु जाह।
छटपटाइत अछि बिहार
भ्रष्टमुक्त होयबा ले’
ब्याकुल छह
सूइया मे फाड़ जगह पएबा ले’।
भुन्ना आ’ भाकुर सब
गलफर भरैत अछि,
राजा इमानदार चेफड़ी सटैत अछि।
डा0 चन्द्रमणि.
दीर्घ चाण्डाल रौद सं दगधल मनुख
पाबि सकलैये छाहरि
भूमिगत मनुख सब निकलल
पसरल अछि जहाँ-तहाँ
जेना पथारक छिड़आयल राहड़ि।
पओलक अछि जगह छिड़अयबाक
आ’ संगहि उग्रास।
पापक तापसं रौद कोनो कम छल
रब्बीके दाउन करैत बड़द जकाँ
लोको बेदम्म छल।
बड़दक हिस्साक भूस्सा
बेचैत अछि बटेदार
पीबैत अछि ताड़ी,
आ’ मनुख त’ मनुखेक
खाइछ हिस्सेदारी।
कछमछाइत लोक
श्रम केर मूल्य ताकैये
जगलैये चेतना
चौक-चौराहा पर
मुँह फोलि बाजैये।
दर्द के भोगनिहार भोगी
बुझैत अछि आब
की थिक परिवर्तन
आ’ की थिक विकास।
सभाक भीड़मे घुसिआइत अछि
भाषण सुनैत अछि
गुनैत अछि अपनो जे
के खाइत अछि ओकर हिस्सा ?
कियै बजैत अछि लोक
भ्रष्टाचारक खिस्सा।
भोगियोके नाम पर उठल छै पैसा
बरखो पहिने।
मुँह चुप्प करबाक भेटल रहै फीस
गमछामे चारि सेर गहूम
आ’ एक चौथाइ टाका
घर रहबे नहि करइ
भेल रहै फाका।
मनरेगाक लेबर मे
नाम छैक एकरो
लाभ एकरा कहाँ
भेटल रहै ककरो।
भेटै छै अन्न आब
कैंचा किछु काज ले’
ब्याकुल छल भोगी
सुखमय सुराज ले’।
भीड़ सं फराक भोगी
अतीतकेँ सोचैत अछि
गाँधीक नाम पर
की की ने होइत अछि।
खाइत अछि कुकुर
दोख लागै गिरथाइन के
निम्मन छै बन्न रहौ
चुलहा हलुआइन के।
इन्दिरा आवास ओह!
मनरेगा आह!
छोड़िके बिहार बन्धु आर कतहु जाह।
छटपटाइत अछि बिहार
भ्रष्टमुक्त होयबा ले’
ब्याकुल छह
सूइया मे फाड़ जगह पएबा ले’।
भुन्ना आ’ भाकुर सब
गलफर भरैत अछि,
राजा इमानदार चेफड़ी सटैत अछि।
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