बलमा भेलइ शराबी गे बहिना जरि गेल हमर कपार ।
प्रेम वचन कहियो ने सुनइ छी,
सुख सेनुर के किछु ने बुझइ छी
जिनगी कोनाके सम्हारी गे बहिना जरि गेल हमर कपार ।
आध पहर राति मे घर आबइ
बेहोशी मे हमरा जगाबइ
मोनक सेहन्ता पजारी गे बहिना जरि गेल हमर कपार ।
हमरा त' तिल तिल तरसाबइ
छाती सं बोतल के लगाबइ
नोरे भीजइये साड़ी गे बहिना जरि गेल हमर कपार ।
कोन जनम के तप चूक कयलौं
सोना सन तन माटि मिलयलउँ
दैव देलनि दु:ख भारी गे बहिना जरि गेल हमर कपार ।
डा0 चन्द्रमणि.
Saturday, 31 March 2012
Thursday, 29 March 2012
षट्कोण. डा0 चन्द्रमणि.
निज राज-काज सं मतलब अछि बड़ नीक बात।
अप्पन बाड़ी-फुलवाड़ी संग
आंगन दलान मधुरिम बसात
के करत प्रश्न ?
पुरुखाक राज पएबाक हेतु
चाही संकुल संपूर्ण तंत्र
एकसर गुरुदेवहु छथि असक्क
आ' असहाय।
अछि गोलवृत्त सन सूर्य
ने कखनहु परिवर्तित
तेँ,शक्तिमान जीवनदाता।
आ'जकर गोलाई घटत बढत
खन हैत नतोदर उदरोन्नत
निज अस्तित्वहि पर अठबज्जर
नेंगराइत स्वयं चलि जैत
अमावश उदर मध्य।
तेँ छैक जरूरी
रहय वृत्त सदिखन अटूट
नहि टूट-फूट मंगलदायक
ई दु:खदायक।
छी देखि रहल-
जनकक संतति सबहक जुटान
बैसार भेल अछि गोल-गोल
मतभिन्न उदर सबहक दुगोल।
केओ छथि शीबू योगी सन
ई निर्विकार ओ भोगी सन
जे पाँडु, पड़ल छथि रोगी सन
बेटाक आस
छोड़थि निसास।
दू-दू टा भुज बिच अलग कोण
षट्कोण बनओलनि छ: टा जन
अप्पन मर्जी आ'अप्पन मन।
गति रहितनि रहितिथ गोलवृत्त
पग-पग पर बाधित भेलनि गति
बुझू दुर्गति।
जल अछि अथाह
नहि थाह कतहु सिंहासन केर
तैराक बिसरिके लक्ष्य
तकै छथि रेहु माँछ
पुच्छी में अगबे हैत काँट
स्वादहु कम्मे।
चाही सबकेँ बड़का मूड़ा
मन केर मनोरथ हो पूरा
दय रहल हथोरिया माँछ लेल
अनमोल खजाना बिसरि देल।
अछि यैह फर्क-
मैथिलजन आ'सेनाक बीच
जहिना नायक बिनु भीड़
कहाबैत'छि मेला
बस सैह थिकहुँ।
हमसब नहि छी भेड़िया धसान
विस्फोटित बम सन छितरायल
सबहक मुँह सबदिस बौरायल।
कतबहु अगुआ सेवथु मसान
धरना पेटकुनिया देल करथु
दुनिया ले' कहबथु महादेव
हमरा सबले' एहिना धनि सन।
मैथिल मनमऔजी रहल सदा
सेनापति सं भ'क' फराक
मनमत्त नाँच कय गरिथैया
सब फाँड़ बान्हि देखबैछ जोश
ओ कल्याणहि ओ मालकोश
मेला बिच गाओत अलग राग
जिनगी बीतल अछि खोंटि साग
मैथिल समाज!
आबहु त'जाग!!
आबहु त'जाग!!!
अप्पन बाड़ी-फुलवाड़ी संग
आंगन दलान मधुरिम बसात
के करत प्रश्न ?
पुरुखाक राज पएबाक हेतु
चाही संकुल संपूर्ण तंत्र
एकसर गुरुदेवहु छथि असक्क
आ' असहाय।
अछि गोलवृत्त सन सूर्य
ने कखनहु परिवर्तित
तेँ,शक्तिमान जीवनदाता।
आ'जकर गोलाई घटत बढत
खन हैत नतोदर उदरोन्नत
निज अस्तित्वहि पर अठबज्जर
नेंगराइत स्वयं चलि जैत
अमावश उदर मध्य।
तेँ छैक जरूरी
रहय वृत्त सदिखन अटूट
नहि टूट-फूट मंगलदायक
ई दु:खदायक।
छी देखि रहल-
जनकक संतति सबहक जुटान
बैसार भेल अछि गोल-गोल
मतभिन्न उदर सबहक दुगोल।
केओ छथि शीबू योगी सन
ई निर्विकार ओ भोगी सन
जे पाँडु, पड़ल छथि रोगी सन
बेटाक आस
छोड़थि निसास।
दू-दू टा भुज बिच अलग कोण
षट्कोण बनओलनि छ: टा जन
अप्पन मर्जी आ'अप्पन मन।
गति रहितनि रहितिथ गोलवृत्त
पग-पग पर बाधित भेलनि गति
बुझू दुर्गति।
जल अछि अथाह
नहि थाह कतहु सिंहासन केर
तैराक बिसरिके लक्ष्य
तकै छथि रेहु माँछ
पुच्छी में अगबे हैत काँट
स्वादहु कम्मे।
चाही सबकेँ बड़का मूड़ा
मन केर मनोरथ हो पूरा
दय रहल हथोरिया माँछ लेल
अनमोल खजाना बिसरि देल।
अछि यैह फर्क-
मैथिलजन आ'सेनाक बीच
जहिना नायक बिनु भीड़
कहाबैत'छि मेला
बस सैह थिकहुँ।
हमसब नहि छी भेड़िया धसान
विस्फोटित बम सन छितरायल
सबहक मुँह सबदिस बौरायल।
कतबहु अगुआ सेवथु मसान
धरना पेटकुनिया देल करथु
दुनिया ले' कहबथु महादेव
हमरा सबले' एहिना धनि सन।
मैथिल मनमऔजी रहल सदा
सेनापति सं भ'क' फराक
मनमत्त नाँच कय गरिथैया
सब फाँड़ बान्हि देखबैछ जोश
ओ कल्याणहि ओ मालकोश
मेला बिच गाओत अलग राग
जिनगी बीतल अछि खोंटि साग
मैथिल समाज!
आबहु त'जाग!!
आबहु त'जाग!!!
Wednesday, 21 March 2012
नव निर्माण करी । डा0 चन्द्रमणि.
नव निर्माण करी,नव निर्माण करी ।
आउ युवाजन!मिलिक' नूतन मिथिला केर निर्माण करी ।। नव निर्माण करी...
विश्व विजय कय सकी उड़ाबी बाधा-ब्याधि पहाड़
तम आसुरी प्रवृत्ति हटाबी हम शक्तिक भंडार
लक्ष्य साधि हम चलल पथिक छी बाट ने कोनो दुर्गम
ओजक ओजन नव उमंग ल' अनुप्राणित छी सदिखन
सुख-वैभव -मधु-आकर्षण सं विलग सतत् गतिमान रही ।नव निर्माण करी...
गउरव गरिमा सं ज्योतिर्मय मिथला केर इतिहास
सुखद भविष्यक निर्माणक हित अर्पित जीवन चास
एक मात्र अछि ध्येय हमर नव मिथिला केर निर्माण
बिनु शोषण उत्पीड़न के हो आजुक मधुर विहान
न्यायोचित अधिकार लेल हम सब संभव बलिदान करी ।नव निर्माण करी...
पूबा- पछिमा-दछिनाहा केर तजि संकुचित विचार
मिथिलावासी सब छी मैथिल क' ली अंगीकार
जातिवाद केर श्राद्ध क्रिया कय मिथिला मैथिल लेल लड़ी
भाषा मम् सबठाँ हो पूजित हम प्रयास एहि लेल करी
पैघ छोट आ' धनी गरीबक गणनाहुक अवशान करी । नव निर्माण करी...
डा0 चन्द्रमणि.
आउ युवाजन!मिलिक' नूतन मिथिला केर निर्माण करी ।। नव निर्माण करी...
विश्व विजय कय सकी उड़ाबी बाधा-ब्याधि पहाड़
तम आसुरी प्रवृत्ति हटाबी हम शक्तिक भंडार
लक्ष्य साधि हम चलल पथिक छी बाट ने कोनो दुर्गम
ओजक ओजन नव उमंग ल' अनुप्राणित छी सदिखन
सुख-वैभव -मधु-आकर्षण सं विलग सतत् गतिमान रही ।नव निर्माण करी...
गउरव गरिमा सं ज्योतिर्मय मिथला केर इतिहास
सुखद भविष्यक निर्माणक हित अर्पित जीवन चास
एक मात्र अछि ध्येय हमर नव मिथिला केर निर्माण
बिनु शोषण उत्पीड़न के हो आजुक मधुर विहान
न्यायोचित अधिकार लेल हम सब संभव बलिदान करी ।नव निर्माण करी...
पूबा- पछिमा-दछिनाहा केर तजि संकुचित विचार
मिथिलावासी सब छी मैथिल क' ली अंगीकार
जातिवाद केर श्राद्ध क्रिया कय मिथिला मैथिल लेल लड़ी
भाषा मम् सबठाँ हो पूजित हम प्रयास एहि लेल करी
पैघ छोट आ' धनी गरीबक गणनाहुक अवशान करी । नव निर्माण करी...
डा0 चन्द्रमणि.
Thursday, 15 March 2012
Political abuse.
Dear! We elect our representatives.P.M. or C.M. rules the country or state on people's verdict.Rulers are the creations of public in democracy.Hence, we must not abuse our creations.It is sin.Yes,if we are not satisfied with our creations,we should be alert for better creation next time.Every step during manufacturing should be taken in the favour of our motherland.
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