मनुख जकरा जननीक त्यागक ज्ञान नहि हो,
मनुख जकरा जन्मभूमिक प्रति मान नहि हो,
मनुख जकरा पिताक प्रति सम्मान नहि हो,
मनुख जकरा संतानक प्रति सिनेह नहि हो,
मनुख जकरा आन्तरिक विवेक नहि हो,
मनुख जकरा अपना धन सं संतोष नहि हो,
मनुख जकरा नीक बेजायक होश नहि हो,
मनुख जकरा कृतज्ञताक भाव नहि हो,
मनुख जकरा पर सत्यक प्रभाव नहि हो
मनुख जकरा बातक ब्यवस्था नहि हो,
मनुख जकरा ईश्वर मे आस्था नहि हो-----राक्षस थीक।
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