Saturday, 11 February 2012

ठुमरी.

सजनवा,सात समन्दर पार ।
कौनसे कारण देश छोड़ गये सूना है घरवार।
उपवन कूक रही कोयलिया,दौड़ रही ये चंचल नदिया,
पुरबैया करती किलोल है पानेको अधिकार। सजनवा...
तन पिंजड़ा खाली बिन पंछी,बिन सजना ये काजल बिंदी,
ये गेसू ये गजरा रोये ,रोये मोतिम हार। सजनवा....
मेरे घर आके तो देखे,इतना धन है कौन समेटे,
भरूँगी खाली दुनिया उनकी,इतना दूँगी प्यार।सजनवा...
डा0चन्द्रमणि.

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