Saturday, 12 November 2011

Apna Bihar

अपना बिहार
       डाº चंद्रमणि

भारत माता का दिल बिहार,
जीवन-ऊर्जा काबिल बिहार।
यह धर्म-चक्र सा चलता है,
नभ छूने को ये मचलता है।।

       मिट्टी यह परम पुनीता है,
       तनया जगजननी सीता है।
       यह वाल्मीकि की रामायण,
       सिर पर रज धरते नारायण।।

सम्राट अशोका की माटी,
नर को भी ईश बना जाती।
भगवान महावीर-बुद्ध यहाँ,
ये शांति देव परिशुद्ध यहाँ।।

       गुंजित विद्यापति गीत यहाँ,
       कण-कण शुचि है रस-प्रीत यहाँ।
       विज्ञानी आर्यभट्ट सा सुत,
       अति ज्ञानी कालिदास अद्भुत।।

हो चुके कर्ण हैं दानवीर,
गुरु हुए गोविंद सिंह कुँवर वीर।
यह क्रांति-दूत है धरती का,
गणतंत्र प्रथम यह जगती का।।

       नालंदा विश्व-ज्ञान-अधिपति,
       उदयन मंडन और वाचस्पति।
       गंगा गंडक कोशी कमला,
       है पुण्य भूमि उर्वर विमला।।

यह कीर्ति-ध्वजा का धावक है,
आजादी का संवाहक है।
गांधी जी की यह कर्म-भूमि,
यह पाञ्चजन्य-ध्वनि धर्मभूमि।।

       अपना बिहार यह न्यारा है,
       हमको प्राणों से प्यारा है।
       इतिहास रहा गौरवशाली,
       है वर्त्तमान-गति बलशाली।।

हम प्रगति पंथ पर चलते हैं,
हम अपनेपन मे पलते हैं।
शत-कोटि नमन है निर्विकार,
जय हो जय हो अपना बिहार।।

2 comments:

  1. Monak bat mon ke chu gel .....byaktigat sa manav matra tak ke soch apana sab ke atite ta me nai bartmano me mahan banaout..... http://pankajjha23.blogspot.in/

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  2. (Mithila Says to Bihar)

    रे बिहार तोरा लाज नञिं होयछौ ?

    अऊंड़ीक सहरा देलियौ, त़ हांथि धऽ लेले।
    घरि में आबए देलियौ, तऽ बन्हक बना लेले।
    हम्मर धिया-पुताकें नुन पढ़ कऽ खीआ देले।
    हमर खुशहाल दुनिञां में अन्हरिया आनि देले।

    मुंह पर कुक्कुर मुततौ, तोहर एहन दिन एतौ।
    ३ टुकड़ी तऽ पहिनहीं भेल छे, २-३ टुक आर होतौ ।
    भारतक नक्शा सं वज़ूद खतम भऽ जतौ।
    मिथिलाक शाप छउ, अस्तित्वहीन भऽ जैबे।

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